:
Breaking News

Bihar News: जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के नए नियम लागू, एक साल बाद DM-SDM और दो साल बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में जन्म और मृत्यु के देर से पंजीकरण को लेकर 1 अक्टूबर 2026 से नए प्रावधान लागू हो गए हैं। एक से दो साल की देरी पर DM-SDM और दो साल से अधिक पुराने मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी होगी।

पटना, 3 अक्टूबर आलम की खबर: बिहार में जन्म और मृत्यु का प्रमाण पत्र बनवाने वालों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब जन्म या मृत्यु की घटना के बाद पंजीकरण में देरी होने पर केवल आवेदन जमा करना पर्याप्त नहीं होगा। देरी की अवधि के आधार पर दस्तावेजों की जांच और सक्षम अधिकारी से अनुमति लेने की जरूरत पड़ सकती है। खास तौर पर लंबे समय से लंबित जन्म और मृत्यु के मामलों में प्रशासनिक तथा न्यायिक स्तर पर मंजूरी की व्यवस्था की गई है।

नई व्यवस्था में समय सीमा को सबसे महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। जन्म या मृत्यु की सूचना निर्धारित अवधि में देने पर सामान्य प्रक्रिया के तहत पंजीकरण कराया जा सकता है, लेकिन समय बीतने के साथ प्रक्रिया कठिन होती जाएगी। इसका उद्देश्य देर से होने वाले पंजीकरण में गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेज के आधार पर प्रमाण पत्र जारी होने की संभावना को रोकना है।

एक साल तक की देरी वाले मामलों में क्या होगा?

यदि जन्म या मृत्यु की सूचना समय पर दर्ज नहीं कराई गई और मामला एक साल के भीतर का है, तो निर्धारित दस्तावेजों के साथ विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। ऐसे मामलों में देरी का कारण और संबंधित दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।

आवेदक को संबंधित रजिस्ट्रार के समक्ष निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करना होगा। मामले की प्रकृति के अनुसार शुल्क और आवश्यक दस्तावेज भी जमा करने पड़ सकते हैं।

एक साल से अधिक और दो साल तक पुराने मामले

जन्म या मृत्यु की घटना को एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन दो साल पूरे नहीं हुए हैं, तो ऐसे मामलों में पंजीकरण के लिए उच्च स्तर की मंजूरी की जरूरत होगी।

इस श्रेणी में जिलाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी अथवा अधिकृत अधिकारी स्तर से जांच और अनुमति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उपलब्ध दस्तावेजों और मामले की वास्तविकता की जांच के बाद ही पंजीकरण को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

इसका मतलब साफ है कि एक साल से अधिक पुराने मामले अब सामान्य पंजीकरण की तरह सीधे निपटाए नहीं जाएंगे। आवेदक को अतिरिक्त दस्तावेज और सक्षम अधिकारी की अनुमति की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है।

दो साल से ज्यादा पुराने जन्म-मृत्यु के मामलों में न्यायिक मंजूरी

यदि जन्म या मृत्यु की घटना को दो साल से अधिक समय बीत चुका है, तो ऐसे मामले में प्रक्रिया और अधिक औपचारिक हो जाएगी। इस श्रेणी में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होगी।

मजिस्ट्रेट उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर मामले की सत्यता की जांच के बाद पंजीकरण की अनुमति दे सकते हैं। यानी दो साल से अधिक पुराने मामलों में प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ न्यायिक स्तर की मंजूरी भी जरूरी होगी।

21 दिन के भीतर पंजीकरण कराने पर राहत

समय पर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने वाले लोगों के लिए प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान रहेगी। जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिनों के भीतर संबंधित रजिस्ट्रार को देने पर पंजीकरण के लिए शुल्क नहीं लिया जाता है।

इसके बाद सूचना देने पर निर्धारित नियमों के अनुसार विलंब शुल्क लागू हो सकता है। जैसे-जैसे देरी की अवधि बढ़ती जाएगी, दस्तावेज और मंजूरी की आवश्यकता भी बढ़ सकती है।

इसलिए परिवारों के लिए यह जरूरी है कि बच्चे के जन्म या परिवार में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद संबंधित पंजीकरण समय पर कराया जाए।

कहां कराया जाता है जन्म-मृत्यु का पंजीकरण?

जन्म और मृत्यु का पंजीकरण संबंधित क्षेत्र के अधिकृत रजिस्ट्रार के माध्यम से कराया जाता है। अस्पताल में जन्म या मृत्यु होने की स्थिति में संस्थान की ओर से पंजीकरण संबंधी सूचना देने की व्यवस्था हो सकती है। वहीं घर पर हुई घटना के मामले में संबंधित स्थानीय निकाय और निर्धारित रजिस्ट्रार के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जाती है।

शहरी क्षेत्र में नगर निकाय तथा ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत स्तर की व्यवस्था के अनुसार आवेदन किया जाता है। आवेदन से पहले संबंधित कार्यालय से आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रिया की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।

प्रमाण पत्र क्यों जरूरी है?

जन्म प्रमाण पत्र आज कई सरकारी और गैर-सरकारी कार्यों में महत्वपूर्ण दस्तावेज बन चुका है। स्कूल-कॉलेज में प्रवेश, पहचान से जुड़े दस्तावेज, पासपोर्ट, सरकारी सेवाओं और अन्य कई कार्यों में जन्मतिथि तथा जन्मस्थान के प्रमाण के रूप में इसकी आवश्यकता पड़ सकती है।

इसी तरह मृत्यु प्रमाण पत्र परिवार के लिए संपत्ति, पेंशन, बैंक खाते, बीमा और अन्य कानूनी एवं प्रशासनिक कार्यों में जरूरी दस्तावेज होता है।

ऐसे में पंजीकरण में देरी करने पर भविष्य में परिवार को अतिरिक्त प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।

आवेदकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराते समय अस्पताल से मिले दस्तावेज, संबंधित व्यक्ति की पहचान से जुड़े कागजात और घटना से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए। पुराने मामलों में दस्तावेजों की कमी होने पर प्रक्रिया और लंबी हो सकती है।

एक साल से अधिक पुराने मामलों में संबंधित प्रशासनिक अधिकारी की मंजूरी और दो साल से अधिक पुराने मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति की आवश्यकता होने के कारण आवेदन करने से पहले संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय से वर्तमान प्रक्रिया की जानकारी लेना जरूरी होगा।

नई व्यवस्था का मूल उद्देश्य जन्म और मृत्यु के पंजीकरण को अधिक व्यवस्थित बनाना और देर से होने वाले पंजीकरण की जांच को मजबूत करना है। इसलिए जन्म या मृत्यु की सूचना समय पर दर्ज कराना सबसे आसान तरीका है। पुराने मामलों में आवेदक को देरी की अवधि के अनुसार निर्धारित दस्तावेज, शुल्क और मंजूरी की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

यह भी पढ़ें: बिहार में सरकारी दस्तावेज और आम लोगों से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाओं की ताजा जानकारी Alam Ki Khabar पर पढ़ें।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *